
newsintercontinentalmu.in में हिन्दी पाठकों के अनुरोध पे आज से ‘व्यासपीठ-हिन्दी’ का आरंभ हो रहा है। राष्ट्र भाषा हिन्दी के प्रसार मे हिन्दी सिनेमा ने अहम भूमिका निभाई है। यह वर्ष हिन्दी सिनेजगत के सदाबहारअभिनेता देव आनंदसाहब के जन्मशताब्दी का वर्ष है। देवआनंदसाहब का जीवनआलेख रोचक एवं नुतन तथ्यों के साथ उजागर किया है इंदौर के बहुप्रतिभाशाली व्यक्तित्व के धनी नीलमाधवजी ने। नीलमाधवजीका परिचय आगे आ ही रहा है। इस अवसर पर सभी पाठकों से अनुरोध है के इस व्यासपीठ पे उनका लेखन अपने फोटो एवं संक्षिप्त परिचय के साथ व्हाॅटसअप नंबर 8805007076 या newsintercontinental29@gmail.com ई मेल पे भेज सकते है । धन्यवाद।

नीलमाधव वसंत भुसारी
M.Com., L.L.B., CAIIB.
P.G. Diploma in Yog Therapy,
Diploma in Fitness Nutrition
पता-
2 – A, Vandana Nagar Extn. Near Sainath Colony, Indore 452018 ( M. P.)
मोबाईल नंबर: 94250 77266
YouTube link : https://youtu.be/NV6f5BtGjMs
नौकरी-
38 साल बाद भारतीय स्टेट बैंक से अग्रिम सेवानिवृत्त
अन्य गतिविधियां–
- यूथ हॉस्टेल असोसिएशन में ट्रेकिंग सहभागिता
- ट्रेक्स का नियोजन, आयोजन,राष्ट्रीय कार्यकारिणी में प्रतिनिधीत्व
- कई मराठी और हिन्दी नाटकों की मंच पर प्रस्तुतियां
- आकाशवाणी B Grade कलाकार, वहां भी कई नाटकों में सहभागिता
- 18 साल से योग प्रशिक्षक
- विगत 28 माह से अनवरत ऑनलाईन फ्री योग कक्षा का संचालन
- शायर मजरूह सुल्तानपुरी पर YouTube के माध्यम से 20 भाग प्रसारित
- “संगीतिका” हमारी अपनी सुरों को समर्पित संस्था द्वारा मजरूह साहब के गीतों पर आधारित 4 कार्यक्रमों की संकल्पना व संचालन..
“मैं भी वीर सावरकर. .अंश मात्र”, स्वातंत्र्यवीर सावरकर जी के त्याग और बलिदान पर विशेष रूप से हिंदी में तैयार किया हुआ 90 मिनिट का व्याख्यान. अब तक 5 सफल प्रस्तुतियां. राष्ट्रोत्थान अभियान में योगदान का प्रयास..
सदाबहार एव्हरग्रीन शतायुषी देव आनंद

लेखक ~ नीलमाधव वसंत भुसारी
श्री धरमदेव पिशोरीमल आनंद उर्फ देव आनंद साहब को उनके सौवें जन्म दिवस पर समर्पित यह आलेख …
अजरामर शतायुषी देव साहब का जन्म 26 /9 /1923 को शकरगढ़ तहसील गुरदासपुर पूर्व पंजाब में वकील साहब पिशोरीलाल जी के घर पर हुआ |
हम उनके दो भाइयों को ज्यादा अच्छी तरह जानते हैं चेतन और केतन पर उनके एक और भाई थे श्री मनमोहन आनंद और एक बहन शीलाकांता कपूर जो दिग्दर्शक शेखर कपूर की माताजी है |डलहौजी में पढ़ाई फिर लाहौर से स्नातक अंग्रेजी साहित्य में पास किया एम.ए.करने की ख्वाहिश थी जो पूरी ना हो सकी पर देव साहब को यह पता था कि वह बाकी लोगों से कुछ अलग है और उन्हें कुछ और करना है|

1940 में मुंबई पहुंचे जेब में सिर्फ ₹30 लेकर, फिर कुछ छुटपुट नौकरियां की और अपने भाई चेतन के साथ इप्टा जाने लगे| प्रभात फिल्म के श्री बाबूराव पै की नजर इन पर पड़ी और फिर 1946 में हम एक है से रुपहले पर्दे पर देव साहब का आगमन हुआ इसी बीच गुरुदत्त साहब से उनकी गहरी दोस्ती हो चुकी थी |
दिलीप- राज और देव, इस त्रिमूर्ति का आगमन चित्रपट जगत में तकरीबन एक साथ ही हुआ और तीनों ने अपना अपना प्रेक्षक वर्ग,चहेते निर्माण किए, तीनों की अपनी-अपनी खासियत है पर देव साहब के चहेते थे तब भी थे, आज भी है और कल भी रहेंगे| उन्हें अपनी अच्छाइयां व कमियां बहुत अच्छे से पता थी और उसी के कारण अपनी मेहनत लगन से पूरे 65 वर्ष तक 1946 कि हम एक है से लेकर 2011 की चार्ज शीट तक उन्होंने सबके दिलों पर राज किया, 112 चित्रपट उसमें से 92 चित्रपटों में हीरो की भूमिका अदा की| देव साहब की चलने की एक विशिष्ट आदत संवाद अदायगी, फैशनेबल रहन-सहन, प्रेम प्रसंग में सहजता, आंखों से प्रेयसी के प्रति छलकने वाली आत्मीयता, ऐसे अनेक अंदाज दर्शकों के दिलों दिमाग पर छा गए| कठोर परिश्रम, जबरदस्त आत्मविश्वास, अतुलनीय सकारात्मक सोच के बल पर आगे बढ़ते चले गए 1948 में प्रदर्शित जिद्दी हिट हुई और फिर देव साहब ने नवकेतन फिल्म्स की स्थापना की सन 1949 में निराला 1950, बाजी 1957, आंधिया 1952, टैक्सी ड्राइवर 1954, हाउस नंबर 44 1955,और नौ दो ग्यारह 1957 जबरदस्त हिट हुई और सदाबहार चॉकलेट हीरो की स्टाइल, बालों का गुच्छा, उनकी टोपियां और मफलर उनके चहेतों के गले में हर गली में दिखने लगे|

प्रख्यात अभिनेत्री सुरैया के साथ प्रेम प्रकरण में असफलता ने देव साहब को बुरी तरह तोड़ दिया था, पर जल्दी ही संभल गए एक साक्षात्कार में देव साहब कहते हैं, मैं दुनिया के लिए बना हूं, जबरदस्त आत्मविश्वास, देखिए मैं बहुत ही सीधा-साधा और मिलनसार आदमी हूं, मैं जैसा हूं वैसा ही आपके सामने आया हूं बिल्कुल झिझक मत कीजिए जो मन में है वह बात कहिए, उन्हें आए हुए फोन वह खुद ही उठाते थे और “देव हीयर” करके सामने वाले से बात करते थे, देव आनंद साहब समय के पक्के थे कभी शराब और सिगरेट को हाथ नहीं लगाया ना कहीं पार्टियों में, शादियों में आना-जाना किया| देव साहब साल भर में सिर्फ चार चित्रपटों के लिए हां करते थे ताकि वे उनके लिए भरपूर समय दे पाए और चित्रपट समय पर पूर्ण हो, जंजीर में अमिताभ और तीसरी मंजिल में शम्मी कपूर साथ में राजेंद्र कुमार, मनोज कुमार जॉय मुखर्जी, विश्वजीत को भी कई फिल्में देव साहब के मना करने पर मिली|
फिल्म बाजी में कल्पना कार्तिक मोना सिंगा, एक पंजाबी क्रिश्चियन गर्ल का फिल्मों में पदार्पण हुआ, टैक्सी ड्राइवर फिल्म के दौरान दोनों में मोहब्बत हो गई और शूटिंग से गायब होकर दोनों शादी करके लौटे तो कैमरा मैन को अंगूठी दिखाई दी वह पूछने लगा तो देव साहब ने उसको चुप रहने को कहा|
चित्रपट जगत में योग्य कथानक, सह कलाकार, गीतकार, संगीतकार और अच्छा दिग्दर्शन देव साहब के भाग्य में ही था तो सफलता कैसे दूर रहती| एक ऐसा सुरीला गठबंधन बना सचिन दा मजरुह साहब और किशोर जी के बीच सचिन दा और मजरुह साहब ने 20 फिल्मों में साथ में काम किया उसमें से 10 फिल्मों में देव साहब थे, इसमें कोई शंका की बात नहीं की देव साहब की रोमांटिक छवि को बढ़ाने में इन तीनों का महत्वपूर्ण हाथ था|

नवकेतन के शुरू में चेतन आनंद बाद में विजय आनंद, गुरुदत्त और कई साथी थे, तो पटकथा, गीत और संगीत भी देव स्टाइल में बनने लगे| देव साहब के दांतों में एक तरफ कुछ गॅप थी, खालीपन था,किसी के कहने पर देव साहब ने उसे भरवा लिया पर फिर संवाद में तकलीफ होने लगी तो फिर लौट आए, और वही खालीपन, गॅप उनकी मुस्कान की खासियत बन गई, काला पानी फिल्म के बाद न्यायालय ने देव साहब को काले रंग का सूट पहनकर आम जनता में जाने से मना कर दिया ऐसा कहते हैं की लड़कियां उन्हें काले सूट में देखकर पागल हो जाती थी और कुछ की आत्महत्या की भी खबरें आई थी| देव साहब के पूरे दुनिया में कई चाहने वाले और असीमित प्यार करने वाले थे और रहेंगे भी एक किस्सा नवाज शरीफ का, जब शांति के दौर में बस यात्रा प्रारंभ हुई तो तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई जी ने पूछा आप क्या पसंद करते हैं? आपके लिए क्या लेकर आए? तो जवाब था आप देव साहब को साथ में लेकर आए और देव साहब उसी बस में सवार होकर पाकिस्तान पहुंचे अपने दीवाने से मिलने के लिए| ऐसी ही देव आनंद साहब के प्रति अपनी दीवानगी पुणे में सदाबहार देव आनंद उद्यान, देव साहब की शुरुआत प्रभात फिल्म पुणे से हुई स्वाभाविक रूप से देव साहब को पुणे से लगाव था, देव साहब जिस पहाड़ी पर घूमने जाते थे उसके पास में जैकी श्रॉफ और देव प्रेमी युवराज शाह और साथियों ने एक उद्यान देव साहब की यादों को तरोताजा रखने के लिए बना दिया|
कई अभिनेताओं और अभिनेत्रियों का प्रथम पदार्पण देव साहब के कारण हुआ, सफलता भी उनके कारण मिली | देव साहब ने हर पीढ़ी
पर राज किया, दादी, बेटी, पोती और अब तो पड्पोतीयां भी प्यार करती है|
देव साहब ने नवकेतन के बैनर तले कुछ महत्वपूर्ण चित्रपट निर्मित किया जिसमें प्रमुख है हाउस नंबर 44, फंटूश, नौ दो ग्यारह, काला पानी, काला बाजार, हम दोनों, तेरे घर के सामने, ज्वेल थीफ, प्रेम पुजारी, हरे रामा हरे कृष्णा, शरीफ बदमाश, हीरा पन्ना, और महत्वपूर्ण गाइड इसके साथ ही देव साहब ने अन्य बॅनर्स तले भी बहुत अच्छे सुंदर चित्रपट दिए हैं उसमें प्रमुख है सीआईडी, पेइंग गेस्ट, अमरदीप , लव मैरिज, 16 साल, मुंबई का बाबू, जब प्यार किसी से होता है, असली नकली, बाद एक रात की, माया, तीन देवियां, दुनिया, जॉनी मेरा नाम| नवकेतन इंटरनेशनल के बैनर तले तेरे मेरे सपने और छुपा रुस्तम| देव साहब ने 40 के दशक से लेकर अपनी मृत्यु तक कमला कोटनीस, कामिनी कौशल , सुरैया से लेकर टीना मुनीम तक कई अभिनेत्रियों के साथ में काम किया उनमें प्रमुख थी नलिनी जयवंत, मीना कुमारी, नरगिस, मधुबाला ,नूतन, साधना, माला सिन्हा, आशा पारेख, वहीदा रहमान और हेमा मालिनी |

देव साहब को सभी प्रमुख गायको ने अपना स्वर दिया तलत महमूद, हेमंत कुमार, मुकेश पर उन्हें रोमांटिक हीरो बनाने में खास करके मोहम्मद रफी साहब और किशोर कुमार जी का प्रमुख योगदान है, देव आनंद साहब के लिए पहला गाना रफी साहब ने साल 1947 में आगे बढ़ो चित्रपट में गाया था “सावन की घटाओं धीरे-धीरे आना” किशोर साहब को मौका मिला 1948 की फिल्म जिद्दी और गाना था “मरने की दुआएं क्यों मांगू जीने की तमन्ना कौन करें, कौन करें”|

देव साहब के अगर पुरस्कारों की बात की जाए तो उन्हें दादा साहेब फाल्के अवार्ड, पद्म भूषण, दो फिल्मफेयर अवार्ड, फिल्म फेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड, आईआई लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड और अन्य कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार मिले |

फिल्म गाइड उनकी जीवन का एक महत्वपूर्ण चित्रपट साबित हुआ लिव्ह इन रिलेशनशिप पर बनी फिल्म गाइड उस वक्त पहले सप्ताह तो बिल्कुल नहीं चल पाई पर धीरे-धीरे लोगों को चित्रपट समझ में आने लगा और फिर गाइड को लोगों ने हाथों-हाथ उठा लिया |1965 में प्रदर्शित यह चित्रपट अपने आप में क्लासिक सिद्ध हुआ इंग्लिश और हिंदी दोनों भाषाओं में इसे बनाया गया था, गाइड को सेंसर बोर्ड ने अटका दिया तब सूचना और प्रसारण मंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के लिए एक खास शो का आयोजन किया गया और आखिर में इंदिरा गांधी के कहने पर गाइड प्रदर्शित हुआ, एक एक से एक हिट गाने देने वाला चित्रपट अभी भी देखा जाता है| हालांकि देव साहब चिरायु है पर इस एकमात्र फिल्म में देव साहब की मृत्यु को बताया गया है और फिर देव साहब कहते हैं
आग में फेंक दो मैं जलुंगा नहीं, तलवार से वार करो, मैं कटुंगा नहीं तुम अहंकार हो,
तुम्हें मरना होगा,
मैं आत्मा हूं अमर हूं,
मौत एक ख़याल है,
जैसे जिंदगी एक ख़याल है,
ना सुख है ना दुख है,
ना दिन है ना दुनिया,
सिर्फ मैं, मैं, मै, मैं हूं और सिर्फ मैं,
हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाला यह कलाकार अपने उम्र के 88 वर्ष तक कर्मयोगी था, आखिरी सांस इन्होंने लंदन के एक होटल में ली पर तब भी वह एक स्क्रिप्ट पर काम कर रहे थे 3 दिसंबर 2011 तो महज एक तारीख है |
हम सब की दुनिया को हसीन और रंगीन करने वाले देव साहब, देवत्व हमेशा अमर रहता है, देव कभी मरता नहीं देव था, है और हमेशा रहेगा..
देव साहब की अमिट याद को एक आदरांजली.. 🌹🙏🌹
आलेख प्रस्तुति..
नीलमाधव वसंत भुसारी, इंदौर
संपर्क : 94250 77266
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